दुकान का अता-पता नहीं, फिर भी सप्लाई हो गए सीमेंट, ईंट और बोर पंप!
सरपंच और सचिव की मिलीभगत से शासकीय राशि के गबन की बू, धरातल पर काम ठप।
जांच की मांग: कागजों पर चल रहा विकास कार्य, चंद दिनों में निकाल लिए लाखों रुपए।
सारंगढ़-बिलाईगढ़।
छत्तीसगढ़ के नवगठित सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बटाऊपाली ‘अ’ से भ्रष्टाचार और शासकीय राशि के खुलेआम गबन का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा गांवों के विकास के लिए भेजी जाने वाली 15वें वित्त आयोग की राशि का यहां किस कदर दुरुपयोग और बंदरबांट किया जा रहा है, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण सोशल मीडिया और क्षेत्र में वायरल हो रहे बिलों से मिलता है।
प्राप्त दस्तावेजों और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत बटाऊपाली ‘अ’ में विकास कार्यों और सामग्री आपूर्ति के नाम पर ‘विश्वनाथ ट्रेडर्स’ नामक एक कथित फर्म के नाम से लाखों रुपए के फर्जी बिल लगाकर राशि का आहरण कर लिया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि क्षेत्र में इस नाम की कोई वास्तविक सामग्री मूलक दुकान या हार्डवेयर स्टोर अस्तित्व में ही नहीं है! जब दुकान ही नहीं है, तो लाखों की सामग्रियां कहाँ से खरीदी गईं? यह सीधे तौर पर एक सुनियोजित वित्तीय घोटाले और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
चंद दिनों के भीतर लाखों का खेल: बिलों की खुली पोल
वायरल हो रहे बिलों की पड़ताल करने पर भ्रष्टाचार की क्रोनोलॉजी साफ समझ आती है। मई 2026 के महीने में ही बिना अस्तित्व वाली इस फर्म के नाम पर करीब 2,97,000 रुपए (लगभग 3 लाख) के बिल धड़ाधड़ पास करा लिए गए:
1. दिनांक 05/05/2026 (बिल क्र. 06): नलकूप में पाइप डालने के नाम पर एकमुश्त 40000 रुपए का बिल लगाया गया।
2. दिनांक 10/05/2026 (बिल क्र. 15):बोर मोटर पंप और ‘CRI Submersible Pump (2HP)’ के नाम पर सीधे 1,07,000 रुपए का आहरण किया गया।
3. दिनांक 18/05/2026 (बिल क्र. 30): स्कूल भवन में पानी व्यवस्था और पाइप/सॉकेट जॉइंटर के नाम पर 50,000 रुपए का बिल लगाया गया।
4. दिनांक 24/05/2026 (बिल क्र. ४०):‘शौचालय निर्माण’ के नाम पर 100 बोरी अल्ट्राटेक सीमेंट, ईंट, गिट्टी, रेत और स्टील बार दिखाकर सीधे 1,00,000 रुपए का आहरण कर लिया गया।
इसके अलावा, शिवकुमार साहू नामक एक अन्य हैंडपम्प/बोर रिपेयरर के नाम पर भी 17/05/2026 को 25,350 रुपए का बिल (बिल क्र. 26) लगाया गया है। इन सभी बिलों पर ग्राम पंचायत बटाऊपाली ‘अ’ की सरपंच ‘अनीता’ के हस्ताक्षर और बकायदा सील-मोह्रर लगी हुई है, जो यह साबित करती है कि यह पूरा खेल पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों के संरक्षण में खेला गया है।
कागजों पर चमका गांव, धरातल पर निर्माण कार्य ठप
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में विकास के कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। जिन कार्यों के नाम पर लाखों रुपए आहरित किए गए हैं, वे धरातल पर या तो गायब हैं या अत्यंत घटिया स्तर के हैं। ‘विश्वनाथ ट्रेडर्स’ के नाम पर जो बिल जारी किए गए हैं, उनमें न तो कोई स्पष्ट जीएसटी नंबर (GSTIN) का वैधानिक उल्लेख है और न ही वह कोई पंजीकृत बड़ी दुकान है। बिना भौतिक सत्यापन के इतनी बड़ी रकम का भुगतान केवल और केवल कागजी हेरफेर और कमीशनखोरी के बड़े नेटवर्क के कारण ही संभव हो सका है।
जिम्मेदार मौन, उच्च स्तरीय जांच की दरकार
इस पूरे मामले में जब दुकान के वजूद को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो सरपंच-सचिव और संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, सारंगढ़-बिलाईगढ़ के कलेक्टर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जिला पंचायत से मांग की है कि पूरे मामले की तत्काल एक निष्पक्ष उच्च स्तरीय टीम गठित कर जांच कइसराई जाए।
सवाल तो यह भी उठता है कि….
1. /बिना भौतिक सत्यापन के और बिना किसी वास्तविक दुकान के, पंचायत के खातों से लाखों रुपए की राशि किस आधार पर ट्रांसफर कर दी गई?
2/ क्या उप-अभियंता (Sub-Engineer) और जनपद के अधिकारियों ने इस कार्य का मूल्यांकन (Valuation) किया था? या सिर्फ बंद कमरों में बैठकर कमीशन का हिस्सा तय कर लिया गया?
यदि इस मामले की बारीकी से जांच की गई, तो न सिर्फ ग्राम पंचायत बटाऊपाली अ बल्कि पूरे जनपद क्षेत्र में फर्जी वेंडरों के नाम पर चल रहे भ्रष्टाचार के एक बहुत बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हो सकता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर भ्रष्टाचार पर क्या दंडात्मक कार्रवाई करता है या फिर हमेशा की तरह इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।





