सारंगढ़ में भ्रष्टाचार को मिला ‘सरकारी कवच’! गायब फर्म के लाखों के बिलों पर जांच अधिकारी सुरेश राठिया ने मोड़ा मुंह
कागजी फर्म से लाखों का आहरण! जब जांच करने पहुंचे सुरेश राठिया तो बंद कर दिया मामला!
सारंगढ़ बिलाईगढ़ – जनपद पंचायत सारंगढ़ के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बटाउपाली ‘अ’ में 15वें वित्त आयोग की राशि के कथित दुरुपयोग और फर्जी बिलिंग का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2025-26 के विकास कार्यों के नाम पर कागजों में अस्तित्वहीन और अमान्य फर्मों के फर्जी बिल लगाकर सरकारी खजाने को चपत लगाई गई है। लेकिन मामले में नया मोड़ तब आया, जब जांच का जिम्मा संभाल रहे अधिकारी सुरेश राठिया की भूमिका पर ही गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कागजी वेंडर के सहारे लाखों का खेल?
शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि ग्राम पंचायत बटाउपाली ‘अ’ द्वारा 15वें वित्त योजना के तहत जिन बिलों का भुगतान दर्शाया गया है, वे पूरी तरह निराधार हैं। आरोप है कि जिस फर्म या वेंडर के नाम से बिल जारी कर राशि आहरित की गई है, उसका कोई जीवित, सक्रिय या वैध पंजीकरण ही नहीं है। बिना सामग्री आपूर्ति और बिना वास्तविक काम के केवल कागजी खानापूर्ति कर राशि का बंदरबांट कर लिया गया।
जांच अधिकारी सुरेश राठिया पर लीपापोती का आरोप
ग्रामीणों और शिकायतकर्ता का कहना है कि जब जन शिकायत पोर्टल के माध्यम से इस गंभीर वित्तीय अनियमितता की निष्पक्ष जांच की मांग की गई, तो जांच अधिकारी सुरेश राठिया ने मामले की गहराई में जाने के बजाय लीपापोती का रास्ता चुना।
आरोप है कि अधिकारी सुरेश राठिया ने:
वेंडर की वैधता, जीएसटी पंजीकरण और वास्तविक सामग्री आपूर्ति जैसे मूल बिंदुओं को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।
मामले की दिशा मोड़ते हुए एकतरफा और भ्रामक जांच रिपोर्ट तैयार कर ली।
“शिकायत की पुष्टि नहीं होना” दर्शाकर मामले को आनन-फानन में ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की।
उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
जांच अधिकारी की इस कार्यशैली से व्यथित होकर अब मामले की शिकायत जिला स्तर के उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई गई है। आवेदक ने मांग की है कि:
सुरेश राठिया द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
ग्राम पंचायत बटाउपाली ‘अ’ के वर्ष 2025-26 के 15वें वित्त के सभी बिलों, फर्मों के पंजीकरण और स्थल पर हुए भौतिक कार्यों की जिला स्तरीय स्वतंत्र टीम से जांच कराई जाए।
गलत और भ्रामक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर दोषियों को बचाने का प्रयास करने वाले जांच अधिकारी सुरेश राठिया के खिलाफ नियमानुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को संज्ञान में लेकर जांच अधिकारी के इस रवैये पर क्या कदम उठाता है या फिर कागजों में सिमटे इस कथित भ्रष्टाचार पर पर्दा पड़ा ही रहेगा।





